तेलंगाना शिक्षक पात्रता परीक्षा (TG TET - हिंदी) के लिए "शब्द भेद" (Word Classification) एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्याकरणिक विषय है।
एक या एक से अधिक सार्थक वर्णों के समूह को शब्द कहते हैं। जब यही शब्द व्याकरण के नियमों में बँधकर वाक्य में प्रयुक्त होते हैं, तब वे पद कहलाते हैं।
हिंदी व्याकरण में शब्दों का वर्गीकरण मुख्य रूप से 4 आधारों पर किया जाता है:
1. स्रोत / उत्पत्ति / इतिहास के आधार पर
उत्पत्ति के आधार पर शब्द के मुख्य रूप से 4 भेद (तथा एक उपभेद 'संकर') होते हैं:
| भेद | परिभाषा | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| तत्सम | संस्कृत भाषा के वे शब्द जो बिना किसी परिवर्तन के मूल रूप में हिंदी में प्रयुक्त होते हैं। | अग्नि, सूर्य, दुग्ध, रात्रि, गृह, मयूर, कर्ण |
| तद्भव | संस्कृत के वे शब्द जो समय के साथ परिवर्तित/विकृत होकर हिंदी में आए हैं। | आग, सूरज, दूध, रात, घर, मोर, कान |
| देशज | वे शब्द जो स्थानीय बोलियों या आवश्यकतानुसार गढ़े गए हैं और जिनकी उत्पत्ति का स्पष्ट स्रोत नहीं मिलता। | लोटा, पगड़ी, झोंपड़ी, खटखटाना, तेंदुआ, खिड़की |
| विदेशज (विदेशी) | विदेशी भाषाओं के प्रभाव से हिंदी में शामिल हुए शब्द (अरबी, फ़ारसी, अंग्रेज़ी, तुर्की, पुर्तगाली आदि)। | अरबी-फ़ारसी: किताब, वकील, अदालत, कानून अंग्रेज़ी: स्कूल, डॉक्टर, बस, टिकट तुर्की: कैंची, चाकू, तोप, कुली पुर्तगाली: आलपीन, गमला, बाल्टी, साबुन |
| संकर शब्द | दो भिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल से बने नए शब्द। | रेलगाड़ी (अंग्रेज़ी + हिंदी) टिकटघर (अंग्रेज़ी + हिंदी) वर्षगांठ (संस्कृत + हिंदी) |
2. रचना / बनावट / व्युत्पत्ति के आधार पर
बनावट के आधार पर शब्द के 3 भेद होते हैं:
- रूढ़ शब्द:
- ऐसे शब्द जिनके सार्थक खंड (टुकड़े) नहीं किए जा सकते और जो किसी विशेष अर्थ के लिए पारंपरिक रूप से प्रसिद्ध हैं।
- उदाहरण: नाक, कान, जल, घर, पेड़, दूध। (यदि 'जल' के टुकड़े 'ज + ल' करें, तो उनका कोई स्वतंत्र सार्थक अर्थ नहीं निकलता)।
- यौगिक शब्द:
- दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों या शब्दांशों (उपसर्ग/प्रत्यय/संधि/समास) के मेल से बने शब्द।
- उदाहरण: विद्यालय (विद्या + आलय), सुपुत्र (सु + पुत्र), घुड़सवार (घोड़ा + सवार), दूधवाला।
- योगरूढ़ शब्द:
- वे यौगिक शब्द जो अपना सामान्य अर्थ छोड़कर किसी विशेष/परंपरागत अर्थ में रूढ़ (प्रसिद्ध) हो जाते हैं।
- नोट: बहुव्रीहि समास के समस्त उदाहरण 'योगरूढ़' होते हैं।
- उदाहरण:
- पंकज = पंक (कीचड़) + ज (जन्मा) \rightarrow केवल 'कमल' के लिए रूढ़।
- दशानन = दस आनन (मुख) वाला \rightarrow 'रावण' के लिए रूढ़।
- लंबोदर = लंबा उदर है जिसका \rightarrow 'श्री गणेश'।
3. प्रयोग / व्याकरणिक रूप परिवर्तन के आधार पर
व्याकरणिक कार्य एवं विकार (बदलाव) के आधार पर शब्द 2 श्रेणियों में बँटते हैं:
(क) विकारी शब्द (4 प्रकार)
जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक या काल के प्रभाव से विकार (परिवर्तन) आ जाता है:
- संज्ञा (Noun): लड़का \rightarrow लड़के \rightarrow लड़कों
- सर्वनाम (Pronoun): वह \rightarrow वे \rightarrow उनका
- विशेषण (Adjective): अच्छा \rightarrow अच्छी \rightarrow अच्छे
- क्रिया (Verb): पढ़ता है \rightarrow पढ़ती है \rightarrow पढ़ते हैं
(ख) अविकारी शब्द / अव्यय (4 + 1 प्रकार)
जिन शब्दों पर लिंग, वचन, कारक या काल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता और वे सदैव एकसमान रहते हैं:
- क्रियाविशेषण: धीरे-धीरे, आज, यहाँ, बहुत (जैसे: राम धीरे-धीरे चलता है / सीता धीरे-धीरे चलती है)।
- संबंधबोधक: के बिना, के साथ, के ऊपर, के पीछे।
- समुच्चयबोधक (योजक): और, तथा, किंतु, परंतु, अथवा।
- विस्मयादिबोधक: अरे!, वाह!, शाबाश!, हे भगवान!
- निपात (अव्यय का उपभेद): जो किसी शब्द के बाद लगकर उस पर विशेष बल देते हैं (जैसे: ही, भी, तो, तक, मात्र, भर)।
4. अर्थ के आधार पर
- सार्थक शब्द: जिनका निश्चित अर्थ निकलता है।
- एकार्थी: जिनका केवल एक ही अर्थ होता है (उदा. दिल्ली, सोमवार)।
- अनेकार्थी: जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं (उदा. कनक = सोना/धतूरा, कर = हाथ/टैक्स/किरण)।
- समानार्थी (पर्यायवाची): समान अर्थ देने वाले (उदा. सूर्य = रवि, दिनकर, भास्कर)।
- विपरीतार्थक (विलोम): विपरीत अर्थ देने वाले (उदा. उदय का अस्त, सत्य का असत्य)।
- श्रुतिसम भिन्नार्थक: उच्चारण में समान किंतु अर्थ में भिन्न (उदा. अंश = कंधा, अंश = हिस्सा / कुल = वंश, कूल = किनारा)।
- निरर्थक शब्द: जिनका स्वतंत्र रूप से कोई अर्थ नहीं होता, पर बोलचाल में सार्थक शब्दों के साथ प्रयुक्त होते हैं।
- उदाहरण: चाय-वाय, रोटी-वोटी, पानी-वानी (यहाँ 'वाय', 'वोटी', 'वानी' निरर्थक हैं)।
TG TET परीक्षा उपयोगी क्विक ट्रिक्स (Quick Revision Tips)
- तत्सम vs तद्भव ट्रिक:
- 'क्ष', 'त्र', 'ज्ञ', 'श्र', 'ऋ' और 'ष' वर्ण वाले शब्द प्रायः तत्सम होते हैं (जैसे: क्षेत्र \rightarrow खेत, रात्रि \rightarrow रात)।
- चंद्रबिंदु (
ँ) वाले शब्द लगभग हमेशा तद्भव होते हैं (जैसे: चाँद, आँख, गाँव)।
- योगरूढ़ पहचान: जहाँ भी कोई तीसरा विशेष अर्थ निकले (बहुव्रीहि समास), वह आँख मूँदकर योगरूढ़ होगा।
- अविकारी पहचान: वाक्य में कर्ता का लिंग या वचन बदलकर देखें; जो शब्द न बदले, वही अव्यय/अविकारी है।


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