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हिंदी की 100 प्रमुख और लोकप्रिय लोकोक्तियाँ

यहाँ हिंदी की 100 प्रमुख और लोकप्रिय लोकोक्तियाँ उनके अर्थ सहित दी गई हैं। इन्हें समझने में आसानी के लिए पाँच अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:


1. सामान्य एवं प्रसिद्ध लोकोक्तियाँ (1–20)

  1. अंधों में काना राजा: मूर्खों के बीच थोड़ा ज्ञान रखने वाला व्यक्ति भी बड़ा माना जाता है।
  2. अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है: अपने घर या क्षेत्र में हर कमजोर व्यक्ति भी बलवान महसूस करता है।
  3. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत: अवसर निकल जाने के बाद पछताने से कोई लाभ नहीं होता।
  4. ऊँट के मुंह में जीरा: आवश्यकता या मांग से बहुत कम मात्रा में वस्तु मिलना।
  5. उल्टा चोर कोतवाल को डांटे: गलती करने वाले का ही उल्टे निर्दोष पर रोब जमाना।
  6. एक पंथ दो काज: एक ही कार्य से दोहरे लाभ होना।
  7. खोदा पहाड़ निकली चुहिया: अधिक परिश्रम करने पर भी बहुत कम लाभ मिलना।
  8. घर का भेदी लंका ढाए: आपसी फूट या घर का भेदी बड़े नुकसान का कारण बनता है।
  9. जैसी करनी वैसी भरनी: जैसा इंसान कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है।
  10. दूर के ढोल सुहावने होते हैं: दूर की चीजें या स्थितियां अच्छी लगती हैं, पास जाने पर सच्चाई पता चलती है।
  11. नाच न जाने आंगन टेढ़ा: काम ठीक से न आना और बहाना बनाना।
  12. नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली: जिंदगीभर बुरे काम करके अंत में धर्म का दिखावा करना।
  13. जहाँ चाह वहां राह: दृढ़ निश्चय और लगन होने पर रास्ता मिल ही जाता है।
  14. जिसकी लाठी उसकी भैंस: शक्तिशाली व्यक्ति की ही जीत होती है।
  15. काला अक्षर भैंस बराबर: बिल्कुल अनपढ़ या निरक्षर होना।
  16. कर भला तो हो भला: दूसरों का अच्छा करने वाले का हमेशा अच्छा ही होता है।
  17. चोर की दाढ़ी में तिनका: अपराधी व्यक्ति हमेशा भयभीत और आशंकित रहता है।
  18. दूध का जला छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीता है: एक बार धोखा खाने के बाद इंसान बहुत सावधान हो जाता है।
  19. खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है: संगति का असर अवश्य पड़ता है।
  20. आसमान से गिरा खजूर में अटका: एक मुसीबत से छूटकर दूसरी बड़ी मुसीबत में फंस जाना।

2. बुद्धिमत्ता, मूर्खता और ज्ञान से जुड़ी लोकोक्तियाँ (21–40)

  1. आप भला तो जग भला: खुद अच्छे हैं तो पूरी दुनिया अच्छी नजर आती है।
  2. आम के आम गुठलियों के दाम: दोहरा लाभ होना।
  3. आगे कुआं पीछे खाई: दोनों तरफ से गंभीर संकट में होना।
  4. ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डरना: जब जोखिम भरा काम शुरू कर दिया तो कठिनाइयों से घबराना कैसा।
  5. कंगाली में आटा गीला: मुसीबत के समय और अधिक मुसीबत आ जाना।
  6. करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान: लगातार अभ्यास करने से मूर्ख भी बुद्धिमान बन जाता है।
  7. काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती: छल-कपट का व्यवहार हर बार सफल नहीं होता।
  8. घर की मुर्गी दाल बराबर: अपनी वस्तु या अपने लोगों का महत्व कम समझना।
  9. घोड़े को लात गधे को बात: मूर्ख और समझदार व्यक्ति से अलग-अलग तरीके से पेश आना पड़ता है।
  10. चोर-चोर मौसेरे भाई: एक जैसे स्वभाव और बुरे आचरण वाले लोग आपस में मिल जाते हैं।
  11. छोटे मुंह बड़ी बात: अपनी योग्यता या औकात से बढ़कर बड़ी बात करना।
  12. जल्दबाजी का काम शैतान का होता है: जल्दबाजी में किए गए काम हमेशा बिगड़ जाते हैं।
  13. जाके पांव न फटी बिवायी, सो क्या जाने पीर पराई: जो खुद कष्ट नहीं सहता, वह दूसरों के दर्द को नहीं समझ सकता।
  14. जैसी बहे पुरवा वैसे बैठै पीठ: समय और परिस्थिति के अनुकूल खुद को ढाल लेना।
  15. ज्यों-ज्यों दवा की त्यों-त्यों मर्ज बढ़ता गया: स्थिति सुधारने के प्रयास में और अधिक बिगड़ जाना।
  16. झूठ के पांव नहीं होते: झूठ कभी लंबे समय तक टिक नहीं सकता, सच सामने आ जाता है।
  17. डूबते को तिनके का सहारा: संकट के समय थोड़ी सी मदद भी बहुत बड़ी राहत देती है।
  18. ढोल में पोल: बाहर से बहुत अच्छा दिखना लेकिन अंदर से पूरी तरह खोखला होना।
  19. तीन लोक से मथुरा न्यारी: सबसे अलग, अनोखा या विशिष्ट होना।
  20. थोथा चना बाजे घना: कम ज्ञान या योग्यता वाला व्यक्ति बहुत दिखावा करता है।

3. संकट, सावधानी और अनुभव से जुड़ी लोकोक्तियाँ (41–60)

  1. दाम बनाए काम: पैसे से सब तरह के काम आसानी से हो जाते हैं।
  2. दान की बछिया के दांत नहीं देखे जाते: मुफ्त या उपहार में मिली वस्तु की कमी या नुक्ताचीनी नहीं की जाती।
  3. दिन दूनी रात चौगुनी: बहुत तेजी से उन्नति या प्रगति करना।
  4. धोबी का कुत्ता घर का न घाट का: किसी एक ठिकाने का न रहना, दोनों तरफ से मारा जाना।
  5. न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी: समस्या की जड़ को ही हमेशा के लिए समाप्त कर देना।
  6. न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेंगी: ऐसी असंभव शर्त रखना जो पूरी न हो सके।
  7. पंचों का कहा सिर आंखों पर: समूह या न्यायसंगत फैसले का आदर करना।
  8. पर उपदेश कुशल बहुतेरे: दूसरों को ज्ञान या उपदेश देना बहुत आसान होता है, खुद अमल करना कठिन।
  9. पाप का पैसा प्रायश्चित में जाता है: बेईमान या अनैतिक तरीके से कमाई गई संपत्ति गलत काम में ही नष्ट होती है।
  10. पांचों उंगलियां घी में होना: चारों तरफ से लाभ होना और ऐशो-आराम में रहना।
  11. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद: अज्ञानी व्यक्ति किसी मूल्यवान वस्तु या गुण की कद्र नहीं समझता।
  12. बड़े बोल का सिर नीचा: अपनी तारीफ या घमंड करने वाले को अंत में अपमान सहना पड़ता है।
  13. बाप न भैया सबसे बड़ा रुपया: दुनिया में पैसे को ही सबसे ऊपर और महत्वपूर्ण माना जाता है।
  14. बिना रोए तो मां भी दूध नहीं देती: अपना हक पाने के लिए भी प्रयास या मांग करनी पड़ती है।
  15. बेगाना शादी में अब्दुल्ला दीवाना: दूसरों के मामलों में बेवजह अत्यधिक उत्साहित या परेशान होना।
  16. भागते भूत की लंगोटी ही सही: भारी नुकसान के बीच जो कुछ भी थोड़ा-बहुत बच जाए, उसी में संतोष करना।
  17. मियां की जूती मियां के सिर: किसी की चालाकी या धूर्तता उसी पर भारी पड़ जाना।
  18. मुंह में राम बगल में छुरी: मन में कपट रखना और ऊपर से बहुत मीठी बातें करना।
  19. यथा राजा तथा प्रजा: जैसा देश का मुखिया या शासक होता है, वैसे ही आम नागरिक होते हैं।
  20. रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई: सर्वस्व बर्बाद होने के बावजूद अहंकार समाप्त न होना।

4. स्वभाव, चरित्र और आदत से जुड़ी लोकोक्तियाँ (61–80)

  1. राजा बड़े तो प्रजा चंचल: मुखिया के लापरवाह या भ्रष्ट होने पर अधीनस्थ लोग भी बिगड़ जाते हैं।
  2. राम नाम जपना पराया माल अपना: धार्मिक होने का दिखावा करना पर असल में धोखे से दूसरों का धन हड़पना।
  3. लातों के भूत बातों से नहीं मानते: दुष्ट और हठ्ठी लोग प्यार या समझाइश से नहीं, सख्ती से मानते हैं।
  4. लोहे को लोहा काटता है: किसी ताकतवर या जिद्दी दुश्मन को हराने के लिए वैसी ही नीति अपनानी पड़ती है।
  5. शेर की खाल में गधा: मूर्ख व्यक्ति का ऊपर से विद्वान होने का दिखावा करना।
  6. सौ सुनार की एक लुहार की: कमजोर व्यक्ति के बार-बार के छोटे प्रयासों के मुकाबले ताकतवर का एक ही प्रहार भारी पड़ता है।
  7. सब धान बाड़े पसेरी: अच्छे और बुरे, दोनों को एक ही तराजू में तौलना यानी सबको एक समान समझना।
  8. सांच को आंच क्या: जो व्यक्ति सच्चा है, उसे किसी भी बात का डर रखने की जरूरत नहीं होती।
  9. हाथ कंगन को आरसी क्या: प्रत्यक्ष या स्पष्ट बात को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।
  10. होनहार बिरवान के होत चिकने पात: प्रतिभाशाली और मेधावी बच्चों के लक्षण बचपन से ही दिखाई देने लगते हैं।
  11. अधजल गगरी छलकत जाए: अल्पज्ञानी या अधूरा ज्ञान रखने वाला व्यक्ति बहुत इतराता और दिखावा करता है।
  12. अंधा बांटे रेवड़ी फिर-फिर अपनों को दे: स्वार्थी व्यक्ति जब अधिकार में होता है, तो केवल अपने करीबी लोगों को फायदा पहुंचाता है।
  13. अंधे के आगे रोना अपना दीदा खोना: ऐसे असंवेदनशील व्यक्ति के सामने दुखड़ा रोना जो आपकी बात समझ न सके।
  14. आ बैल मुझे मार: जानबूझकर किसी मुसीबत या संकट को बुलावा देना।
  15. उतावला सो बावला: बहुत अधिक जल्दबाजी करने वाला इंसान मूर्खतापूर्ण काम कर बैठता है।
  16. एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं: एक ही अधिकार क्षेत्र या स्थान पर दो समान शक्तिशाली लोग नहीं रह सकते।
  17. कबहुं निरामिश होय न कागा: दुष्ट या पापी व्यक्ति अपनी मूल और बुरी आदत कभी नहीं छोड़ता।
  18. खीझें बिल्ली खंभे नोचे: अपनी असफलता या गुस्से का शिकार किसी निर्दोष को बनाना।
  19. गरज पड़े तो सूई भी नहीं मिलती: स्वार्थी लोग सिर्फ अपने काम के समय ही याद करते हैं।
  20. चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए: अत्यधिक कंजूस होना, जान भले चली जाए पर पैसे खर्च न करना।

5. धन, अवसर और विविध लोकोक्तियाँ (81–100)

  1. जस धन वैसा मन: धन आने पर इंसान का स्वभाव और सोच बदल जाती है।
  2. जैसी संगति बैठिये तैसे ही फल दीन: जैसी संगति होती है, इंसान को वैसा ही परिणाम मिलता है।
  3. जाकी प्रभु कृपा करहिं कुठाई: जिस पर ईश्वर की कृपा हो, उसके सारे काम अपने आप बन जाते हैं।
  4. ठठा मज़ाक भारी पड़ना: हंसी-मजाक का परिणाम जब गंभीर या बुरा हो जाए।
  5. तेल देखो तेल की धार देखो: किसी परिस्थिति या मामले को जल्दबाजी में न परखकर, उसके पूरे परिणाम का इंतजार करना।
  6. दाने-दाने पर मुहर है: हर व्यक्ति के भाग्य में लिखा अनाज या अन्न उसे मिलकर रहता है।
  7. दीवारों के भी कान होते हैं: गुप्त बातें भी दूसरों तक पहुँच सकती हैं, इसलिए हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए।
  8. नाको चने चबाना: बहुत अधिक परेशान करना या किसी को कठिन परिस्थिति में डालना।
  9. पानी पीकर जात पूछना: काम निकल जाने के बाद उस व्यक्ति या वस्तु के बारे में सोचना।
  10. पढ़े फारसी बेचे तेल, यह देखो कुदरत का खेल: उच्च शिक्षित व्यक्ति को भी जब योग्यता के अनुसार काम न मिले।
  11. बिल्ली के भागों छींका टूटा: अचानक और बिना प्रयास के कोई बड़ा लाभ हो जाना।
  12. बोया पेड़ बूल का तो आम कहां से होय: जैसा कर्म करोगे, भविष्य में परिणाम भी वैसा ही मिलेगा।
  13. भैंस के आगे बीन बजाना: किसी मूर्ख या नासमझ व्यक्ति को ज्ञान की बातें समझाना व्यर्थ है।
  14. मरता क्या न करता: जब इंसान बुरी तरह संकट में फंस जाता है, तो वह हर संभव असंभव काम करने को तैयार हो जाता है।
  15. मालिक जाने या उसका काम: किसी बाहरी मामले में ज्यादा दखलअंदाजी न करना।
  16. रस्सी को सांप समझना: भ्रम या डर के कारण साधारण चीज को भी खतरनाक समझ लेना।
  17. सीधी उंगली से घी न निकले तो उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है: सीधे तरीके से काम न बनने पर थोड़ी सख्ती बरतनी पड़ती है।
  18. हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और: कथनी और करनी में बहुत बड़ा अंतर होना (दिखावा कुछ और, वास्तविकता कुछ और)।
  19. हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा हो: बिना किसी खास खर्च या मेहनत के बहुत अच्छा काम हो जाना।
  1. हर मर्ज की दवा है: दुनिया की हर जटिल समस्या का कोई न कोई समाधान जरूर होता है।

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